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रजक समाज का इतिहास संक्षिप्त मे

रजक समाज भारत के मूलनीवासी समुदायो मे से एक है और इसका जन्म भी मूलनीवासीयो से ही हुआ है. रजक समाज के लोग अन्य मूलनीवासीयो की तरह बराबरी मे भरोसा करने वाले लोग थे और वे सब बिना भेदभाव के मिलजुलकर रहते थे. रजक समाज के लोग भारत…

गाडगे बाबा का झाड़ू पूजा के किसी फूल से कम नहीं था

साथियों आज उस सख्श की पुण्यतिथि या परिनिर्वाण दिवस है जो केवल 'साक्षर' होते हुए भी गुलामी के उस दौर में शिक्षा की अलख जगा रहा था, जब पढ़ना-लिखना या विद्यालय जाकर शिक्षा ग्रहण करना सबके बूते के बाहर की चीज थी। उन्होंने अपने कीर्तन के माध्यम…

रोजगार के नये आयामों की सुगमता होते हुए भी रजक समाज सदियों से चले आ रहे पुराने कार्यों को ही आमदनी…

साथियों,?? बात शिक्षा व अज्ञानता के लिए विलाप करने से परे की है, वर्तमान सन्दर्भ में लघु एवं कुटीर उद्योग लगाकर, व नवीन तकनीकी का उपयोग कर हम आप छोटी से छोटी शुरुआत कर भविष्य को संवार सकते हैं, सरकारी सहायता का रोना बंद करिए।। मैंने…

समाज का संघटन किस लिये?

धोबी समाज के संघटन हेतू अनेक संघटना कार्यरत है | ऐसी संघटना एवं समाज के कार्यकर्ता जो कार्य कर रहे है उसका आधार मान कर यह समाज का संघटन क्यो करना चाहिये इस विषय पर यह लेख आधारीत है |

धोबी समुदाय के गौरव श्री लंका के पूर्व राष्ट्रपति मा. रणसिंघे प्रेमदासा

रणसिंघे प्रेमदासा, श्रीलंका के राजनेता (जन्म 23 जून, 1924, कोलंबो, सीलोन – मृत्यु 1 मई, 1993, कोलंबो), थे वे राष्ट्रीय नेता के रूप में 25 से अधिक वर्षों तक रहे। नेशन स्टेट असेंबली में 1977-1988 तक रहे और बतौर प्रधानमंत्री 1978-1988 तक तथा…