*लोगों की संख्या बल का कोई महत्व नहीं*

*लोगों की संख्या बल का कोई महत्व नहीं* इतिहास गवाह है कि क्रांति के लिए लोगों की संख्या बल भर कभी पर्याप्त नहीं होती। किसी भी बड़ी क्रांति की रचना सामान्यतयः बड़े जनसमूहों के बजाय आंदोलनकारियों के छोटे-छोटे समूहों ने ही की है। मेरा अपना…

*क्या है महीन जातिवाद?*

जो लोग जितना अधिक पढ़े-लिखे हैं वे उतना ही महीन जातिवाद करते हैं जो हम/आप को आसानी से समझ नहीं आता। हम बड़ी आसानी से कह देते हैं कि अरे! आजकल ऐसा कुछ नहीं है। लेकिन ऐसा होता है, हो सकता है आपको यकीन न हो। तो इसलिए एक उदाहरण बताता हूँ जो…

*आगे बढ़ने के लिए जरूरी है सहयोगात्मक दक्षता*

*आगे बढ़ने के लिए जरूरी है सहयोगात्मक दक्षता* हमें आगे बढ़ने के लिए विभिन्न प्रकार की दक्षताओं की जरूरत है लेकिन ध्यान यह रहे कि विभिन्न प्रकार की दक्षताएं तब तक कोई खास मायने नहीं रखतीं, जब तक कि उसमें बहुत से दूसरे लोगों के साथ आपसी सहयोग…

*संस्थाओं को बैसाखी की तरह काम करना चाहिए*

संस्थाएं समाज से हैं न कि समाज संस्थाओं से। इसलिए संस्थाओं का उद्देश्य अपने लक्ष्य की पूर्ति होना चाहिए न कि किसी एक समूह विशेष या समाज के किसी एक हिस्से विशेष के हितों की पूर्ति। राजीव वोरा कहते हैं कि- स्वस्थ समाज को संस्थाओं की जरूरत…

*धोबी जाति के अनुसूचित जाति में शामिल होने की प्रक्रिया*

किसी भी जाति को अनुसूचित जाति में शामिल, एक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है। भारत का संविधान अनुसूचित जातियों के सदस्यों को कुछ विशेष सुविधाएं/छूट देता है। ये सुविधाएं या छूट भारत के संविधान के अनुच्छेद 341 के प्रावधानों के तहत अधिसूचित…

कोरोना_वायरस_के_दौर_में_लॉकडाउन_के_चलते_खतरे_में_धोबी_और_उनका_व्यवसाय

लॉक डाउन के कारण लागभग पिछले 2 माह से दिहाड़ी मजदूरों के साथ साथ घरेलू कामगार और परंपरागत पेशा करने वाले लोगों के सामने भी अपने अपने परिवार का भरण-पोषण और रोजगार की दिक्कत आ गई है। लॉक डाउन शुरू होने के बाद से ही परंपरागत पेशे में लगे…

*संगठित??, शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और मानसिक रूप से ताकतवर?? समुदाय ही कर सकेगा सामंतवादी…

साथियों *WOrD (वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन फ़ॉर धोबिस)* द्वारा दिनांक 24 मई, 2020 को आयोजित *धोबी समुदाय पर उत्पीड़न और अत्याचार की बढ़ती घटनाएं: कारण, निवारण और रोकथाम* विषय पर ऑनलाइन कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश के विभिन्न राज्यों से समुदाय के…

*आज बात समुदाय और संगठनों की*

साथियों प्रायः यह देखा जाता है कि लोग समुदाय में बन रहे संगठनों से नाखुश हैं, होना भी चाहिए क्योंकि संगठनों के द्वारा समुदाय के लिए किए गए कार्यों का अपेक्षित प्रतिफल अभी तक नहीं मिल सका है। हालांकि सभी संगठनों का उद्देश्य एक ही है समुदाय…

समाज के मेहनतकश लोगों का मुद्दा उसी समाज के पढ़े-लिखे, नौकरीपेशा और सुविधाभोगी वर्ग का भी मुद्दा होना…

साथियों जिस समाज के मेहनतकश लोगों का मुद्दा उसी समाज के पढ़े-लिखे, नौकरीपेशा और सुविधाभोगी वर्ग का मुद्दा नहीं बनता वह समाज तरक्की नहीं कर सकता। इसलिए समाज में सभी को सामंजस्य बनाकर चलना चाहिए। किसी पर समाज को पीछे ले जाने हेतु…

कोरोना व्हायरस- निसर्गासाठी वरदान व मनुष्यासाठी शाप

सद्यस्थितीत धुमाकुळ करत असलेलला कोरोना व्हायरस मनुष्यासाठी शाप आणि निसर्गासाठी एका प्रकारे वरदान ठरलेला आहे. कारण एरवी मनुष्य स्वतः खुप गर्वयुक्त झाला आहे. मराठीतील म्हणीनुसार "गर्वाचे घर खाली" या म्हणीनुसार गर्व हा एक दिवस नाहीसा…