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*बुद्धिवादी आंदोलन के प्रणेता गाडगे बाबा की कर्मभूमि ऋणमोचन की यात्रा*

ऋणमोचन में बड़ी संख्या में पहुंचे संत गाडगे के अनुयायी युगपुरुष, निष्काम कर्मयोगी, स्वच्छता अभियान के प्रणेता संत गाडगे महाराज जी की कर्मभूमि श्री क्षेत्र ऋणमोचन (अमरावती, महाराष्ट्र) में प्रतिवर्ष पौष माह में लगने वाले मेले में 19 जनवरी,…

डेबूजी युथ ब्रिगेडची अमरावती जिल्हाधिकारी कार्यालयात भेट

मा.जिल्हाधिकाऱ्यांना दिले राष्ट्रीय जयंतीचे निमंत्रण आज दि.०७.०२.२०२० रोज शुक्रवार ला डेबूजी युथ ब्रिगेड महाराष्ट्र च्या अमरावती जिल्हा कार्यकारी ने अमरावती चे मा.जिल्हाधिकारी यांची भेट घेऊन त्यांना २३ फेब्रुवारी २०२० रोजी शेंडगाव येथे…

📝 *दूसरे समाज की आलोचना से ज्यादा अपने समाज की कमियों को स्वीकार कर उसे सुधारना व दूर करना होगा* 📝

📝 *दूसरे समाज की आलोचना से ज्यादा अपने समाज की कमियों को स्वीकार कर उसे सुधारना व दूर करना होगा* 📝 साथियों प्रायः यह देखा जाता है कि हम अपनी स्थिति के लिए दूसरों को दोषी ठहराते हैं, जैसे दलितों या यूं कहें कि वंचितों की निम्न स्थिति के…

अगर जिंदा रहना है तो हमें अपनी परंपराओं को बचना ही होगा

साथियों! अगर, हम आज़ादी के बाद अपनी खुद की जरुरत के अनुसार शिक्षा व्यवस्था का विकास करते, जो हमारी जातिगत बुराइयों और रुढियों को तोड़कर, परम्परागत कौशल को एक मज़बूत शैक्षणिक और आर्थिक आधार दे समय के अनुसार निखारता- तो आज हम भी दुनिया में…

शिक्षा ही मुक्ति का द्वार है

साथियों हमारी जाति द्वारा अपने अस्तित्व की लड़ाई में विचार अनिवार्य उपकरण है। क्योंकि विचार शिक्षा से ही पैदा होते हैं और शिक्षा क्लासरूम से शुरू नहीं होती बल्कि बच्चे के जन्म के क्षण से ही शुरू हो जाती है। माता-पिता, वयस्कों और परिवार…

सक्षम और सशक्त सामाजिक-राजनीतिक नेतृत्व समय की जरूरत

*सक्षम और सशक्त सामाजिक-राजनीतिक नेतृत्व समय की जरूरत* साथियों अगर हम सफाई में लगी परंपरागत जातियों को देखें तो पाएंगे कि 2-3 जातियां ही ऐसी हैं जो आज भी अपने परंपरागत पेशे में लगी हैं। आज भी ये जातियां ही सही मायने में समाज सेवा करती…

रजक समाज का इतिहास संक्षिप्त मे

रजक समाज भारत के मूलनीवासी समुदायो मे से एक है और इसका जन्म भी मूलनीवासीयो से ही हुआ है. रजक समाज के लोग अन्य मूलनीवासीयो की तरह बराबरी मे भरोसा करने वाले लोग थे और वे सब बिना भेदभाव के मिलजुलकर रहते थे. रजक समाज के लोग भारत…

धोबी साबुन

क्या कोई अपने पैदा किए हुए बेटे को उपेक्षित करता है या फेंकता है❔ आपका जवाब होगा शायद नहीं। पर हमने किया है ऐसा। हम अपने पुरखों के सम्पूर्ण सृष्टि पर उम्दा और बेजोड़ आविष्कार को अपनाए नहीं रह सके और हमेशा के लिए छोड़ दिया है या घृणित…

रोजगार के नये आयामों की सुगमता होते हुए भी रजक समाज सदियों से चले आ रहे पुराने कार्यों को ही आमदनी…

साथियों,?? बात शिक्षा व अज्ञानता के लिए विलाप करने से परे की है, वर्तमान सन्दर्भ में लघु एवं कुटीर उद्योग लगाकर, व नवीन तकनीकी का उपयोग कर हम आप छोटी से छोटी शुरुआत कर भविष्य को संवार सकते हैं, सरकारी सहायता का रोना बंद करिए।। मैंने…