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Dhobi

गाडगे बाबा का झाड़ू पूजा के किसी फूल से कम नहीं था

साथियों आज उस सख्श की पुण्यतिथि या परिनिर्वाण दिवस है जो केवल 'साक्षर' होते हुए भी गुलामी के उस दौर में शिक्षा की अलख जगा रहा था, जब पढ़ना-लिखना या विद्यालय जाकर शिक्षा ग्रहण करना सबके बूते के बाहर की चीज थी। उन्होंने अपने कीर्तन के माध्यम…

धोबी साबुन

क्या कोई अपने पैदा किए हुए बेटे को उपेक्षित करता है या फेंकता है❔ आपका जवाब होगा शायद नहीं। पर हमने किया है ऐसा। हम अपने पुरखों के सम्पूर्ण सृष्टि पर उम्दा और बेजोड़ आविष्कार को अपनाए नहीं रह सके और हमेशा के लिए छोड़ दिया है या घृणित…

रोजगार के नये आयामों की सुगमता होते हुए भी रजक समाज सदियों से चले आ रहे पुराने कार्यों को ही आमदनी…

साथियों,?? बात शिक्षा व अज्ञानता के लिए विलाप करने से परे की है, वर्तमान सन्दर्भ में लघु एवं कुटीर उद्योग लगाकर, व नवीन तकनीकी का उपयोग कर हम आप छोटी से छोटी शुरुआत कर भविष्य को संवार सकते हैं, सरकारी सहायता का रोना बंद करिए।। मैंने…

समाज का संघटन किस लिये?

धोबी समाज के संघटन हेतू अनेक संघटना कार्यरत है | ऐसी संघटना एवं समाज के कार्यकर्ता जो कार्य कर रहे है उसका आधार मान कर यह समाज का संघटन क्यो करना चाहिये इस विषय पर यह लेख आधारीत है |