जलियांवाला बाग हत्याकांड में अमर शहीद दुलिया और नत्थू धोबी का योगदान

साथियों ?आज ही के दिन अर्थात 13 अप्रैल (1919)को जलियांवाला बाग हत्याकांड में अमर शहीद दुलिया और नत्थू धोबी का योगदान? वर्ष 2015 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधान मंत्री जी ने कहा था- “आज हम जो आजादी की सांस ले रहे हैं, उसके पीछे लाखों…

अगर जिंदा रहना है तो हमें अपनी परंपराओं को बचना ही होगा

साथियों! अगर, हम आज़ादी के बाद अपनी खुद की जरुरत के अनुसार शिक्षा व्यवस्था का विकास करते, जो हमारी जातिगत बुराइयों और रुढियों को तोड़कर, परम्परागत कौशल को एक मज़बूत शैक्षणिक और आर्थिक आधार दे समय के अनुसार निखारता- तो आज हम भी दुनिया में बहुत…

अस्पृश्यता और भेदभावपूर्ण व्यवहार के खिलाफ आजीवन लड़ने वाले संत गाडगे महाराज के साथ अस्पृश्यता और…

साथियों आज (23 फरवरी, 2019) एक ऐसे सख्श की जन्मतिथि है जिसने दुनिया को तो नहीं पर भारत को जरूर सफाई से रहने की तमीज सिखाई। जिसने देवी-देवताओं (पत्थरों के) की सेवा और पूजा को व्यर्थ मान कर निर्धनों, उपेक्षितों, अशिक्षितों आदि की सेवा को ही…

शिक्षा ही मुक्ति का द्वार है

साथियों हमारी जाति द्वारा अपने अस्तित्व की लड़ाई में विचार अनिवार्य उपकरण है। क्योंकि विचार शिक्षा से ही पैदा होते हैं और शिक्षा क्लासरूम से शुरू नहीं होती बल्कि बच्चे के जन्म के क्षण से ही शुरू हो जाती है। माता-पिता, वयस्कों और परिवार…

सक्षम और सशक्त सामाजिक-राजनीतिक नेतृत्व समय की जरूरत

*सक्षम और सशक्त सामाजिक-राजनीतिक नेतृत्व समय की जरूरत* साथियों अगर हम सफाई में लगी परंपरागत जातियों को देखें तो पाएंगे कि 2-3 जातियां ही ऐसी हैं जो आज भी अपने परंपरागत पेशे में लगी हैं। आज भी ये जातियां ही सही मायने में समाज सेवा करती हैं…

गाडगे बाबा का झाड़ू पूजा के किसी फूल से कम नहीं था

साथियों आज उस सख्श की पुण्यतिथि या परिनिर्वाण दिवस है जो केवल 'साक्षर' होते हुए भी गुलामी के उस दौर में शिक्षा की अलख जगा रहा था, जब पढ़ना-लिखना या विद्यालय जाकर शिक्षा ग्रहण करना सबके बूते के बाहर की चीज थी। उन्होंने अपने कीर्तन के माध्यम…

धोबी साबुन

क्या कोई अपने पैदा किए हुए बेटे को उपेक्षित करता है या फेंकता है❔ आपका जवाब होगा शायद नहीं। पर हमने किया है ऐसा। हम अपने पुरखों के सम्पूर्ण सृष्टि पर उम्दा और बेजोड़ आविष्कार को अपनाए नहीं रह सके और हमेशा के लिए छोड़ दिया है या घृणित समझकर…

धोबी समुदाय के गौरव श्री लंका के पूर्व राष्ट्रपति मा. रणसिंघे प्रेमदासा

रणसिंघे प्रेमदासा, श्रीलंका के राजनेता (जन्म 23 जून, 1924, कोलंबो, सीलोन – मृत्यु 1 मई, 1993, कोलंबो), थे वे राष्ट्रीय नेता के रूप में 25 से अधिक वर्षों तक रहे। नेशन स्टेट असेंबली में 1977-1988 तक रहे और बतौर प्रधानमंत्री 1978-1988 तक तथा…