*संगठित🤝🏻, शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और मानसिक रूप से ताकतवर💪🏻 समुदाय ही कर सकेगा सामंतवादी ताकतों से मुकाबला: डॉ. धर्मपाल सांखला*

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साथियों
*WOrD (वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन फ़ॉर धोबिस)* द्वारा दिनांक 24 मई, 2020 को आयोजित *धोबी समुदाय पर उत्पीड़न और अत्याचार की बढ़ती घटनाएं: कारण, निवारण और रोकथाम* विषय पर ऑनलाइन कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश के विभिन्न राज्यों से समुदाय के बुद्धिजीवियों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
विषय की प्रस्तावना रखी बड़े भाई *नरेन्द्र दिवाकर* जी ने। उन्होंने कहा कि धोबी समुदाय एक मेहनतकश, शांति प्रिय और ईमानदारी से अपना कार्य करने वाला समुदाय है। कभी किसी का उत्पीड़न नहीं करते हैं परंतु इधर 2 महीनों में धोबी समुदाय के लोगों को लक्ष्य कर गोली मारने और मार-पीटकर क्षति कारित करने की घटनांए बढ़ी हैं जिसके कारण समुदाय के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। धोबी समुदाय पर होने वाली उत्पीड़न की विभिन्न घटनाओं पर प्रकाश डाला चाहे सम्भल की घटना हो, मुम्बई, रायबरेली, प्रतापगढ़, प्रयागराज, कौशाम्बी, उन्नाव, अयोध्या, इटावा, अमेठी की हो या बिहार और मध्यप्रदेश में धोबी समुदाय के लोगों पर उत्पीड़न की घटना। जिसके तहत 2010 में उड़ीसा में धोबियों पर हुए अत्याचार से लेकर वर्तमान (2020) तक की प्रमुख घटनाओं के बारे में बताया। वर्तमान में जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है तब से उत्तर प्रदेश में धोबी समुदाय के लोगों का एक विशेष वर्ग के द्वारा लगतार उत्पीड़न किया जा रहा है, जो कि अत्यंत दुःखद और निंदनीय हैं। उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करे। विभिन्न वक्ताओं ने अपनी बात रखी।
*रामकरन निर्मल* ने कहा कि अपने समुदाय के जो भी छात्र बीएड बीटीसी या ग्रेजुएशन कोर्स कर चुके हैं उनको एलएलबी करना चाहिए। समुदाय के सभी लोगों को जोड़ना चाहिए जिससे हमारा समुदाय मिलकर आगे की चुनौतियों से लड़ सके। लोगों को अपने मामलों को लेकर कोर्ट जाने से हिचकना नहीं चाहिए जिससे कोर्ट और थानों का डर खत्म हो और अपने हक की लड़ाई लड़ सकें। महिलाओं को भी सक्षम बनाना होगा और उनको भी वकालत की तैयारी करानी होगी ताकि उनके जेहन से कोर्ट और थानों का डर निकाला जा सके। समुदाय में विधिक जागरूकता के साथ-साथ राजनीतिक जागरूकता और एकजुटता का भी आभाव है जिसके कारण अपने ऊपर हुए उत्पीड़न के खिलाफ आवाज मजबूती से नहीं उठा पाते।
*बड़े भाई वर्मा* जी ने कहा कि हम जिस समुदाय में पैदा हुए हैं उसके प्रति हमारा परसेप्शन कमजोर होता है इसलिए उत्पीड़न और अत्याचार की घटनाएं अधिक होती हैं। रोजगार परक शिक्षा पर विशेष महत्व देना होगा तभी हम सभी तरीकों से आगे बढ़ सकते है। जो सक्षम और संपन्न हैं और जिनके पास संसाधन हैं उन्हें संसाधनहीन लोगों से जुड़ने की जरूरत है। हमें विभिन्न क्षेत्रों के लोगों का अलग-अलग फोरम बना कर रणनीति बनाकर काम करना होगा। विशेष तौर से अपने समुदाय के अधिवक्ताओं (वकीलों) का एक फोरम बनाना चाहिए जो उत्पीड़न और अत्याचार के ख़िलाफ़ मुकदमों की पैरवी मजबूती और संजीदगी से करे।
*बलवान सिंह एडवोकेट* जी ने बड़े भाई वर्मा जी की बात का समर्थन करते हुए कहा कि विभिन्न न्यायालयों में भी हमारे समुदाय के अधिवक्ताओं विशेष तौर से पूरे कमज़ोर तबके के लोगों की कमी भी हम पर उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार है। अखिल भारतीय संस्थाओं का चुनाव कैसे होता है? पता नहीं चलता उनमें चुनने का कोई मापदंड नहीं है जिसके कारण समुदाय की प्रगति और उन्नति के लिए प्रतिबद्ध लोग पदाधिकारी नहीं बन पाते, केवल पद की लालसा वाले लोग ही अधिकांश संगठनों में काबिज हैं। जब तक राष्ट्रीय पार्टियां जमीनी स्तर पर पहुंचकर कमजोर तबकों के लिए काम नहीं करेंगी तब तक कमजोर तबकों पर अत्याचार और उत्पीड़न की घटनाएं नहीं रुकेंगी।
*संजय मालिया सर* ने कहा कि अधिकतर त्पीड़न का शिकार वही लोग होते हैं जिनमें शिक्षा का आभाव होता है। शिक्षा का आभाव होने का कारण हममें राजनीतिक चेतना और अपने हकों के प्रति जागरूकता में कमी होती है इसलिए भी ऐसी घटनाएं होती हैं। हमें शिक्षा के क्षेत्र में तीव्र गति से अग्रसर होना होगा तभी हम समाज में अपना स्थान मजबूत कर सकेंगे और संगठित होकर उत्पीड़न के खिलाफ खड़े हो सकेंगे।
*सुनील चौधरी* जी ने कहा कि संगठनों का आपसी तालमेल न होना भी हमारे समाज में अत्याचार होने का प्रमुख कारण है। हमारे समाज के संगठनों को एकजुट होकर इन अत्याचार और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
*नीलकांत जी* ने कहा कि हमें कानूनों और संविधान में दिए गए हमारे अधिकारों के बारे में जानकारी रखनी चाहिए। जिससे हम लॉ एण्ड ऑर्डर को अच्छी तरह से समझ सकें और अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें।
*डॉ. धर्मपाल सांखला सर* ने कहा कि हमारे समाज के लोगों को मानसिक रूप से ताकतवर करना चाहिए इससे पहले आर्थिक रूप से मजबूत होना होगा। गांव की ओर भी शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए रुख करना होगा ताकि ग्रामीण परिवेश में भी शिक्षा के महत्व के बारे में जानकारी पहुंच सके और समुदाय के अधिक से अधिक ज्यादा लोग शिक्षित हो सकें। हमें अपने आपको मानसिक रूप से ताकतवर बनाना होगा तभी हम इन सामंतवादी ताकतों का सामना कर सकते हैं।
*विजय लाल कनौजिया* जी ने कहा कि यदि समुदाय के सभी छोटे-बड़े संगठन एक साथ मिलकर किसी उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाएं तो उस मुद्दे पर सुनवाई हो सकेगी और तेजी से उस पर कार्य किया जाएगा। इन सभी संगठनों को एक साथ उत्पीड़न के ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री को पत्र लिखना चाहिए यदि प्रधानमंत्री या संबंधित मंत्री के पास दो हजार पत्र पहुंचेंगे तो उनको हमारी ताकत का एहसास होगा।
*धर्मेंद्र चौधरी* जी ने कहा कि जब तक हम शिक्षित नहीं होंगे तब तक संघर्ष नहीं कर पाएंगे और शिक्षा ही एक मूल उपाय है इन उत्पीड़नो से बचने और लड़ने का।शिक्षित लोगों को भी समुदाय का नेतृत्व करने के लिए आगे आना होगा तभी हम सामंतवादी ताकतों के खिलाफ लड़ने में सफल हो सकेंगे।
*ममता नरेन्द्र दिवाकर* ने कहा कि समाज में व्याप्त उत्पीड़न और अत्याचार से लड़ने के लिए समुदाय की महिलाओं को भी मानसिक रूप से मजबूत होकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए और यह संभव हो पाएगा लड़कियों की शिक्षा पर जोर देने से।
*डॉ. अनिल कुमार सर* ने कहा कि हमारे समाज का जो शिक्षित तबका है वह अपनी जिम्मेदारियों को निभाने से दूर भाग रहा है और अपनी जिम्मेदारियों से अपने आपको दरकिनार कर रहा है यह भी एक मुख्य कारण है। अपने समाज में बढ़ते उत्पीड़न का हमारे शिक्षित समाज के लोगों को भी विरोध करना चाहिए और उन्हें चाहिए कि वह अपने समाज के लोगों को शिक्षित कर इन सामंतवादी ताकतों से लड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार करना और शिक्षा के लिए जागरूक करना चाहिए। हमारा समुदाय अभी भी अपेक्षित रूप से विकसित नहीं हुआ है। लॉकडाउन हटने के बाद हमारे समुदाय के संगठनों के प्रतिनिधियों को पीड़ित परिवारों से मिलकर उनका साथ देना होगा ताकि इन परिवारों को अत्याचार और उत्पीड़न के खिलाफ लड़ने की हिम्मत मिल सके।

इनके अतिरिक्त संदीप दिवाकर, नीरज चौधरी, विनोद भास्कर आदि साथियों ने भी अपनी बात रखी, जिनकी बातों में धोबी समुदाय के लोगों पर लगातार हो रही उत्पीड़न की घटनाओं के प्रति आक्रोश को साफ देखा जा सकता था। सुरेन्द्र चौधरी, पिन्टू दिवाकर, राहुल दिवाकर, सुंदर लाल निर्मल, मोहित चौधरी, रिंकू दिवाकर, मोनू दिवाकर, विजय कनौजिया, अभिलेश दिवाकर आदि बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।
*नरेन्द्र दिवाकर*
मो. 9839675023

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