रजक समाज का इतिहास संक्षिप्त मे

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रजक समाज भारत के मूलनीवासी समुदायो मे से एक है और इसका जन्म भी मूलनीवासीयो से ही हुआ है. रजक समाज के लोग अन्य मूलनीवासीयो की तरह बराबरी मे भरोसा करने वाले लोग थे और वे सब बिना भेदभाव के मिलजुलकर रहते थे.

रजक समाज के लोग भारत देश के विभिन्न प्रांतो मे आर्यो के आक्रमण से पहले से रहते चले आरहे हैं . आर्य आक्रमण से पहले रजक समाज के लोग अन्य मूलनीवासीयो की तरह खेती और पशु पालन का कम किया करते थे लेकिन आर्यो ने अपने बेहतर हथियारो और घोड़ो के बल पे भारत के मूलनीवासीयो को अपना घर बार खेती बड़ी छोड़ कर जंगल मे रहने के लिए मजबूर कर दिया. स्वाभिमानी मूलनीवासीयो ने सेकडो सालो तक आर्यो से हार नही मानी और वे अपने पशु धन और खेती के लिए आर्यो से लड़ते रहे. आर्यो ने उन्हे राक्षस, दैत्या, दानव इत्याति नाम दिए और उनकी पराजय की झूठी कहानिया लिखी जो आज ब्राह्मण धरम के ग्रंथ बन गये है.

मूलनीवासीयो और आर्यो की लड़ाई सेकडो सालो तक चलती रही और धीरे धीरे आर्यो को यह समझ आने लगा की लड़ाई कर के मूलनीवासीयो को हराया नही जा सकता इसलिए उन्होने अंधविशवास का सहारा लिया और देवी देवताओ के नाम पर मूलनीवासीयो को डरना शुरू कर दिया. भोले भले लोग कपटी ब्राह्मानो की चल को ना समझ सके और धीरे धीरे उनके झाँसे मे आगये . ब्राह्मानो ने मन घड़ंत कहानिया बनाई और सब लोगो मे फैला दी. सालो तक मूलनीवासी इस झूठ को समझकर इस से बचते रहे लेकिन जब झूठ भी सालो तक बोला जाए तो वो सही लगने लगता है इसी तरह मूलनीवासीयो को भी भरोसा होने लगा ब्राह्मानो के भगवान पर. ब्राह्मानो ने मूलनीवासीयो के देवताओ को झूठा कहा और उन्हे डरा डरा कर ब्राह्मानो के देवताओ को मानने के लिए राज़ी कर लिया.

भोले भले मूलनीवासी एक बार जहाँ चालक ब्राह्मानो की बतो मे आगाए तो फिर ब्रह्मनो ने धीरी धीरे खुद को भगवान के बराबर और मूलनीवासीयो को जानवर के बराबर बताकर उन्हे जर जर ज़िंदगी जीने पर मजबूर कर दिया. इस तरह मूलनीवासी आर्या ब्राह्मानो के गुलाम बन कर रह गये.

ब्राह्मानो ने मूलनीवासीयो मे फुट डालने के लिए और हमेशा के लिए उन्हे दबाकर रखने के लिए जाती प्रथा को शुरू किया और अपने हिसाब से अपने हित के लिए सारे क|म मूलनीवासीयो मे बाँट दिए और उनमे उच नीच का भाव भर दिया ताकि वे खुद एक दूसरे से उपर नीचे के लिए लड़ते रहे और ब्राह्मण राज करते रहे. यह आज तक चला आरहा है.

रजक समाज का जन्म उन मूलनीवासीयो से हुआ जिन्हे लोगो को पाप मुक्त करने का काम मिला . शुरूवात मे यह क|म बड़ा सम्मान जनक था. लोग अपनी शुद्धि और मुक्ति के लिए रजक समाज के लोगो के घर जाते और फिर उन्हे घर का पानी छिड़क कर पवित्र एवम पाप मुक्त कर दिया जाता. लेकिन धीरे धीरे इस से रजक समाज की इज़्ज़त बढ़ने लगी और फिर ब्राह्मानो को लगा की उनसे ग़लती हो गई है. इसलिए उन्होने रजक समाज के लोगो का तिरस्कार करना शुरू कर दिया, झूठी कहानिया लिख कर और लोगो को भड़का भड़का के सदियो बाद उन्हे पाप मुक्ति दाता से कपड़े धोने वाला बनाकर रख दिया.

लेकिन आज सभी मूलनीवासीयो की तरह रजक समाज के लोग भी पढ़ लिख गये है और ब्राह्मानो की चाल को समझ गये है . वे ये समझ गये है की वे किसी से कम नही है और कुछ भी कर सकते है. जो काम उन्हे बेइज़्ज़त करने के लिए उनपर थोपा गया था आज वो क|म छोड़कर डाक्टर इंजिनियर कलेक्टर बन रहे है. वे ब्राह्मानो की चल को समझ गये है की किस तरह मंदिर भगवान के नाम पर उनसे क|म कराया जाता रहा , उन्हे अपमानित किया जाता रहा, अब वे और अपमान नही सहने वाले. सम्मान से जीना हर इंसान का हक़ है और वे ये हक लेकर रहेंगे.

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