हमारे समुदाय के महिलाओं की भागीदारी बिजनेस में बढ़े तो…

हमारे समुदाय के महिलाओं की भागीदारी बिजनेस में बढ़े तो...

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महिलाओं को ऐतिहासिक रूप से व्यवसाय/व्यापार के भीतर नेतृत्व की भूमिकाओं से बाहर रखा गया है। हालांकि आज पहले से स्थितियां भिन्न हैं पर बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
नाइजीरिया की स्थिति इस मामले में बेहतर है। अमेरिकन एक्सप्रेस द्वारा कमीशन की गई “2018 स्टेट ऑफ वीमेन-ओन्ड बिजनेस रिपोर्ट” के अनुसार 1972 के बाद से महिलाओं के स्वामित्व वाले व्यवसायों की संख्या में लगभग 3,000% की वृद्धि हुई है अवश्य हुई है परंतु हमारे देश में विशेष तौर पर बहुजन महिलाओं की भागीदारी व्यवसाय/व्यापार में कम ही है।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने व्यवसाय एवं प्रबंधन में महिलाओं की भूमिका विषय पर अपनी दूसरी वैश्विक रिपोर्ट में कहा है कि ऐसे समय में जब कुशल श्रमिकों की कमी है, महिलाएं एक बड़े प्रतिभा समूह का प्रतिनिधित्व कर सकती हैं देश की आर्थिक तरक्की में महती भूमिका भी निभा सकती हैं। (यहां उन महिलाओं की बात की जा रही है जो पढ़ी-लिखी हैं और उनके पास हुनर व जज़्बा भी है पर नौकरी न मिलने के कारण घर-परिवार सम्हाल रही हैं, जबकि यदि घर से अनुमति मिले और वे अपनी काबिलियत और हुनर से बिजनेस करें तो घर-परिवार और देश की प्रगति हेतु बेहतर योगदान हो सकता है।)
व्यापारी वर्ग के लोगों के कारोबार में उनके परिवार के हर सदस्य बच्चे, महिलाएं व बुजुर्ग सभी का थोड़ा-बहुत योगदान अवश्य होता है। जब व्यवसायी काम से बाहर होता है या आराम कर रहा होता है तब उसके बच्चे उसके बिजनेस को सम्हालते हैं क्योंकि उनके बच्चों को दुकान सम्हालना आता है। यही नहीं घर की महिलाएं भी काम से फुरसत पाकर व्यवसाय को सम्हालने लगती हैं। वे इस पर ध्यान नहीं देतीं कि उनके द्वारा व्यवसाय सम्हालने पर लोग क्या कहेंगे? न ही उनके घरों के पुरूष यह कहते पाए जाते हैं कि अरे! इसको देखो अब ये व्यवसाय करेगी? घर के पुरुषों की नाक कटाएंगी बहुजन महिलाओं द्वारा व्यवसाय करना बहुतों (घर और बाहर वाले दोनों) को रास नहीं आता। बहुत लोग तो यह भी कहते हैं कि क्या तुम नहीं कमाओगी तो घर का खर्च नहीं चलेगा क्या? इसके उलट व्यापारी वर्ग की महिलाएं घर और व्यवसाय दोनों बखूबी सम्हालना जानती हैं। उन्हें ग्राहकों को सामान बेचने में कोई संकोच भी नहीं होता। बच्चे पढ़ाई भी करते हैं और पिता के साथ कमाई भी, जिससे उनके भीतर हिसाब-किताब और पैसे की समझ का भाव तो आता आता ही ही है साथ ही जिम्मेदारी का भाव भी आ जाता है। महिलाएं पति का पूरा सहयोग करती हैं, सजावट का सामान भी बनाकर बेचती हैं, यदि घर की किराना दुकान है तो किराना आदि के समान की सफाई भी कर लेती हैं। उनके समुदाय में महिलाएं व्यवसाय के क्षेत्र में हर जगह आगे ही नजर आती हैं घर पर बैठकर समय नहीं काटती हैं। उनके ज़ेहन में एक ही बात होती है- घर की मजबूती के साथ आर्थिक संपन्नता हासिल करना। उनके अधिकांश व्यवसाय उनके घर से जुड़े होते हैं इसलिए वे दुकान और मकान दोनों सम्हालती हैं। किसी ने ठीक ही कहा है कि बहुजनों को भी नीचे दुकान, ऊपर मकान वाली अवधारणा को अपनाना होगा। न केवल इतना ही तमाम ऐसे व्यवसाय हैं जिनमें व्यापारी वर्ग के परिवार की महिलाएं काफी सक्रिय नजर आती हैं।
भारत में महिला उद्यमियों की सूची में कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने संघर्ष और चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी तरक्की का रास्ता आत्मनिर्भरता के साथ सशक्त बनाया। इन्होंने न केवल आर्थिक रूप से समाज की मदद की है, बल्कि अपने भीतर मौजूद क्षमता को उजागर करने के लिए भी बहुत कुछ किया है। ठीक यही कार्य और सक्रियता हमारे समुदाय की महिलाओं को भी अपनाना होगा जिससे वे स्वयं आत्मनिर्भर और सशक्त होने के साथ-साथ समाज और समुदाय की तरक्की व खुशहाली में मदद कर सकेंगी।
*नरेन्द्र दिवाकर*
मो. 9839675023

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