अपने समुदाय की प्रगति के लिए सामूहिक/सामुदायिक प्रयास?????? से भी बहुत कुछ करना होगा*

साथियों पिछले लगभग 70 सालों में देश का विकास तो बहुत हुआ है लेकिन इसमें न तो सभी तबकों, समूहों और समुदायों की समुचित भागीदारी हो सकी है और न ही सभी तबकों का विकास। हमारे समुदाय/समाज की स्थिति भी कुछ इसी तरह है। हम आज भी विकास और भागीदारी के मामले में निचले पायदान पर ही हैं, हालांकि इस बार समुदाय में जिस तरह की राजनीतिक चेतना दिखाई देती है यदि सकारात्मक और एकजुटता बनती ही तो यह भविष्य के लिए बेहतर साबित होगा। सरकारों ने भी हमारे विकास में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। हमारी जनसंख्या और विकास के संदर्भ में न तो सरकार के पास ठीक-ठीक आंकड़ा और न ही हमारे पास। अब तक जो भी आंकड़े हैं वे अनुमानित ही हैं। (अनुसूचित जाति में आने वालों का आंकड़ा तो है पर अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत आने वाले लोगों का आंकड़ा आज भी अनुमान पर ही आधारित है।) आज जिस तरह से राज्यों में राज्य व्यवस्थाओं का हाल है, उनके (सरकारों के) पास हमें/आम जनता को देने के लिए कुछ भी नहीं और जो पहले से है, राज्य सरकारें/केंद्र सरकार भी उसमें कटौती करती जा रही हैं। चाहे वह आरक्षण का मामला हो या हमारे लिए चलाई जाने वाली योजनाएं हों या नौकरी का मामला। हम सभी यह जानते हैं कि आरक्षण का लाभ बहुत थोड़े ही लोगों को मिल पाता/सकता है। सरकारी नौकरियां बहुत व्यवस्थित ढंग से खत्म की जा रही हैं। इसलिए हमें अब अपने सम्मान की लड़ाई सिर्फ संवैधानिक सुविधाओं को प्राप्त करने के रूप में ही नहीं लड़ना होगा। अब हमें सांस्कृतिक रूप से अपने आपको (समाज को) संगठित करना और चेतना सम्पन्न बनाना होगा जिससे हम अपनी लड़ाई लड़ सकें। उन हर क्षेत्रों की ओर रुख करना होगा जहां हमारी तरक्की की संभावना नजर आती है और देश तथा समाज को बदलने का अवसर भी दिखाई देता है। वह क्षेत्र कोई भी हो सकता है पत्रकारिता, राजनीति, अकादमिक संस्थान, व्यवसाय और उद्योग आदि। ये सब क्षेत्र अगर हमारी पहुंच से दूर हैं या अछूते हैं तो हमें अपने समाज में भी ऐसा उत्साह पैदा करना होगा और ऐसी संस्कृति विकसित करनी होगी कि हमारी आने वाली पीढ़ी आसानी से वहां पहुंच सके। इसके लिए हमारे समाज के प्रत्येक जागरूक सदस्य को अपने -अपने स्तर पर प्रयास करना होगा। हमें सिर्फ सरकार या सरकारों के भरोसे अपने समाज के विकास की राह का इंतजार नहीं कर अपने समुदाय की प्रगति के लिए सामूहिक/सामुदायिक प्रयास से भी बहुत कुछ करना होगा। हमें समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले अपने समाज के सदस्यों के अलग-अलग समूह बनाकर यथासंभव उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप सहायता लेकर समाज के विकास हेतु प्रयास करने को अग्रसर होना होगा। नरेन्द्र दिवाकर मो. 9839675023 सुधवर, चायल, कौशाम्बी (उ.प्र.)

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